जानिए राम मंदिर की कुछ मुख्य जानकारी – Ram Mandir Important Things

राम मंदिर जिसे लोकप्रिय रूप में अयोध्या राम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है अयोध्या उत्तर प्रदेश में स्थित एक हिंदू मंदिर है जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह मंदिर भगवान श्री राम को समर्पित है और ऐसा माना जाता है कि इसका निर्माण राम जन्मभूमि भगवान श्री राम की जन्म स्थल पर किया गया है यह राम मंदिर भगवान राम से जुड़ी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को दर्शाता है और हिंदुओं के लिए आध्यात्मिक संस्कृति और धार्मिक महत्व को प्रदर्शित करता है

मंदिर में प्रयुक्त होने वाली निर्माण सामग्री

राम मंदिर के निर्माण में उपयोग की जाने वाली प्रमुख सामग्रियां है

  1. स्टील के उच्च ग्रेड रोड कंपलेक्स कंक्रीट
  2. गुलाबी बलुआ पत्थर
  3. ग्रेनाइट पत्थर
  4. शालिग्राम शिला
  5. तांबे की प्लेट
  6. सोना और अष्टधातु नंबर
  7. सागरों की लकड़ी

राम मंदिर की नींव का डिजाइन

14 मी मोटे रोड कंपलेक्स कंक्रीट को परतदार बनाकर कृत्रिम पत्थर का आकार दिया गया है

फ्लाई एस धूल और रसायनों से बने कंपलेक्स कंक्रीट की 56 परतों का उपयोग किया गया है

नमी से बचाव के लिए राम मंदिर के आधार पर 21 फुट मोटा ग्रेनाइट का चबूतरा बनाया गया है

मंदिर की नींव के डिजाइन में कर्नाटक और तेलंगाना के ग्रेनाइट पत्थर और बस पहाड़पुर भरतपुर राजस्थान के गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है

भाव का विवरण

यह तीन मंजिला मंदिर भूकंप रोधी संरचना है।

इसमें 392 स्तंभ और 44 दरवाजे हैं।

इसके दरवाजे साबुन की लकड़ी से बने हैं और उन पर सोने की परत चढ़ाई गई है।

मंदिर की संरचना की अनुमानित आयु 2500 वर्ष है।

मूर्तियां 6 करोड़ वर्ष पुरानी शालिग्राम शिलांग से बनी है जो गांड की नदी से लाई गई हैं।

घंटा अष्टधातु सोना चांदी तवा जस्ता शिक्षा तीन लोहा और पर से बनाया गया है।

घंटे का भजन 2100 किलोग्राम है।

घंटी की आवाज 15 किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है।

राम मंदिर की अन्य विशेषताएं

मंदिर के मुख्य गर्भ ग्रह में श्री राम लाल भगवान श्री राम का शिशु रूप की मूर्ति है।

1.प्रथम तल पर श्री राम दरबार है।

2.मंदिर में पांच मंडप हैं: नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप, कीर्तन मंडप आदि:

3.परिधि परिकोटा के चारों कोनों पर सूर्य देव मां भगवती भगवान गणेश और भगवान शिव को समर्पित कर मंदिरों का निर्माण किया जाएगा ।

4.उत्तरी दिशा में देवी अन्नपूर्णा का मंदिर होगा और दक्षिणी दिशा में भगवान हनुमान का मंदिर होगा।

5.मंदिर परिसर के भीतर अन्य मंदिर महर्षि वाल्मीकि महा ऋषि वरिष्ठ महर्षि विश्वामित्र महर्षि अगस्त राजा निषाद माता शबरी और देवी अहिल्या को समर्पित होंगे।

6.मंदिर परिसर में सीता कुंड नामक एक पवित्र कुंड भी होगा।

दक्षिण पश्चिम दिशा में नवरत्न कुबेर पहाड़ी पर भगवान शिव के प्राचीन मंदिर का जीवन द्वारा किया जाएगा और जटायु की एक प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

Written by: Mitrapal Rana

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